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Tuesday, April 24, 2007

नमस्ते- नमस्ते

दोस्तो, अभी रवां नहीं हुआ हूँ लेकिन आनंद आ रहा है। अभय, विमल आप लोगों को चिट्ठी- बल्कि चिट्ठा- लिखने का यह पहला मौका है। और, मजे हो रहे हैं? अनिल रघुवंशी कौन हैं? प्रोफाइल से कुछ पता नहीं चला। थोड़ा इसको लिखना-पढ़ना आ जाए तो कुछ और बातें हों। अभी तो सारा कुछ गुरू घंटालों के भरोसे है।