Wednesday, November 27, 2013

टेडी से पूछो

टेडी से पूछो कि उस रात क्या हुआ
वही है अकेला चश्मदीद गवाह
जिसने सच बोलने से कभी मना नहीं किया
और झूठ बोलने का जिसपर कोई दबाव नहीं था

वह आरुषि के साथ खेलता था,
जब वह बहुत छोटी थी
और काफी दिनों तक उसके बड़े होने के बाद भी,
जब और कोई भी उसके साथ नहीं खेलता था

पता नहीं क्यों एक बीतती हुई रात में उसे उठाकर
सोई हुई आरुषि के बगल में फेंक दिया गया
हालांकि अर्से से वह बेड के नीचे ही रहता था-
लड़की तो कब का उसके साथ खेलना छोड़ चुकी थी

सारे टेडी ऐसे ही जीते-मरते हैं
दुलार पाते-पाते एक दिन उनमें जान पड़ जाती है
फिर किसी एक उदास रात में उन्हें लगता है
कि अब वे किसी काम के नहीं रहे

और हां, लड़कों के टेडी तो थोड़ी-बहुत
लत्तम-घूंसम नोंच-खसोट जानते भी हैं
लड़कियों वाले वह भी नहीं जानते
शायद इसीलिए इतनी देर तक दुलराए जाते हैं

सफेद थूथनी वाला यह छोटा सा पीला टेडी
क्या जाने खोपड़ी पर जानलेवा भोथरी चोट
और गले पर धारदार तराश के मायने-
वह तो फोटो खिंचने तक छुए जाने के ही इंतजार में था

सचाई कोई नहीं बताएगा
न पुलिस न सीबीआई न मीडिया न वकील
तुम तो बस इस टेडी से पूछो
कि चौदह साल की बच्ची के साथ कोई वह सब कैसे कर सकता है
जो कूड़े के ढेर पर पड़े एक फटे हुए टेडी के साथ भी नहीं कर सकता

2 comments:

रचना said...

very touching

Manu Tyagi said...

प्रिय ब्लागर
आपको जानकर अति हर्ष होगा कि एक नये ब्लाग संकलक / रीडर का शुभारंभ किया गया है और उसमें आपका ब्लाग भी शामिल किया गया है । कृपया एक बार जांच लें कि आपका ब्लाग सही श्रेणी में है अथवा नही और यदि आपके एक से ज्यादा ब्लाग हैं तो अन्य ब्लाग्स के बारे में वेबसाइट पर जाकर सूचना दे सकते हैं

welcome to Hindi blog reader