Friday, March 15, 2013

क्या हिंदी ब्लॉगिंग दोबारा जिंदा हो सकती है

पांच-छह साल पहले अचानक ऐसा हुआ कि हिंदी की सबसे अच्छी चीजें ब्लॉग पर ही पढ़ने को मिलने लगीं। कंटेंट और भाषा,  दोनों स्तरों पर इतनी ताजगी कि जादू सिर चढ़ कर बोलता था। उन्हीं दिनों देखादेखी मैं भी लिखने वालों में शामिल हुआ। बिल्कुल स्पॉन्टेनियस ढंग से कुछ चीजें लिखीं और इसमें भी उतना ही मजा आया, जितना पढ़ने में आता था। फिर कुछ नौकरी-चाकरी के, कुछ पारिवारिक और कुछ शारीरिक झंझट शुरू हुए और मेरा ब्लॉग लिखना कम होते-होते बंद ही हो गया। लेकिन याद पड़ता है कि इससे पहले ब्लॉग पढ़ना बंद हुआ था, क्योंकि यहां नई चीजें लाने की मेहनत कम और व्यर्थ का, छूंछा वितंडा ज्यादा दिखने लगा था।

एक राय यह है कि ऐसा ब्लॉग के कमर्शियल स्पेस बनने की वजह से हुआ। वितंडा खड़ा करने पर ज्यादा हिट्स मिलते थे और ऐड इनकम बढ़ जाती थी। ऐसा कुछ मित्रों ने पूछने पर बताया-  इसे साबित करने के लिए कोई प्रमाण मेरे पास नहीं है। एक वैकल्पिक वजह यह भी हो सकती है कि अच्छे ब्लॉगरों का कंटेंट कम पड़ने लगा हो और उनका लिखने का सारा मजा ही जाता रहा हो। जो भी हो, खराब सिक्के ने आम दुनिया की तरह हिंदी के ब्लॉगिंग स्पेस में भी अच्छे सिक्के को चलन से बाहर कर  दिया और फिर खुद भी कबाड़ में चला गया।

पिछले साल के मध्य में थोड़ा-बहुत सोशल साइटें देखने की फुरसत और हिम्मत मिली तो दिखा कि खेल का मैदान बदल चुका है। जिन भी ब्लॉगरों के लिंक मेरे पास थे, उनपर नई चीजें बहुत ही कम आ रही थीं। उन्हें फिर से पढ़ पाने की चाहत में फेसबुक पर गया, जहां उनकी सक्रियता की खबरें मिल रही थीं। टेक्नोसैवी मैं हूं नहीं, लिहाजा देख पाने की सीमा है, लेकिन पता नहीं क्यों फेसबुक के साथ मेरी रसाई बिल्कुल ही नहीं हो पाई है।

ब्लॉग से फेसबुक की तरफ ऐसा टेक्टॉनिक शिफ्ट अंग्रेजी में नहीं है। वहां ट्विटर और फेसबुक जैसी चीजों का जो रोल है सो है, लेकिन अच्छे ब्लॉग भी लिखे जा रहे हैं। हालत यह है कि लगभग सभी नामी अखबार और पत्रिकाएं अपने ऑनलाइन एडिशन में चर्चित लेखकों को ब्लॉगर की शक्ल में ही पेश कर रही हैं- हालांकि जेनुइन ब्लॉग कंटेंट के आसपास भी ये नहीं पहुंचते। जानना चाहता हूं कि क्या हिंदी ब्लॉगिंग अब खत्म हो चुकी है। अगर हां तो ऐसा क्यों हुआ। और नहीं तो इसे पहले की ही तरह, बल्कि उससे भी ज्यादा जीवंत बनाने के लिए क्या किया जा सकता है।

8 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

ब्लॉगिंग का अपना आश्वस्त क्षेत्र है, वह कहीं जाने वाला नहीं।

स्वप्नदर्शी said...

mera likhna kam hai, par ab bhii maheene mein ek baar kuch likha hii jaata hai. ek shuaatii hindi likhne kii khushi ke saath pahle jo man mein aaya use bina parvaah kiye likh dene ka silsila jaroor kam hua...

pahle logon ka jo samvaad blog se hota tha, ab fb gappbaaji ka nya adda hai.., serious likhayii kii jagah nahin dikhtii...

Ravishankar Shrivastava said...

ब्लॉगिंग तो कभी मरी ही नहीं थी, तो फिर से जिंदा होने का सवाल कहाँ से उठता है.

ब्लॉगिंग सदा सर्वदा की तरह फल फूल रही है. यहाँ देखें -

http://www.haaram.com/Default.aspx?ln=hi

चंद्रभूषण said...

रवि बॉस,एक समस्या कोई ढंग का एग्रीगेटर न मिलने की भी थी, जो शायद आपके भेजे लिंक से हल हो जाए। इससे जुड़ने के लिए मुझे क्या करना चाहिए?

रचना said...



jo blog laekhan me pehlae serious they wo ab bhi haen , jinhae kewal networking karni thii wo fb ityadi par haen aur social networking kar rahae haen
naari blog indianwomanhasarrived.blogspot.com abhi bhi apni jagah par haen :)

Arvind Mishra said...

हाँ ब्लागिंग के कंटेंट गुणवत्ता में कमी तो जरुर है !

अल्पना वर्मा said...
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अल्पना वर्मा said...
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