tag:blogger.com,1999:blog-5004531893346374759.post4029642613438940839..comments2008-03-22T17:55:28.433-07:00Comments on पहलू: हां जी, मैं खांमखांचंद्रभूषणhttp://www.blogger.com/profile/11191795645421335349noreply@blogger.comBlogger6125tag:blogger.com,1999:blog-5004531893346374759.post-44929383505274097962008-03-22T17:55:00.000-07:002008-03-22T17:55:00.000-07:00धारदार !धारदार !arvind mishrahttp://www.blogger.com/profile/02231261732951391013noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-5004531893346374759.post-41564293747207023902008-03-21T07:43:00.000-07:002008-03-21T07:43:00.000-07:00गूढ़ प्रश्नों से दूर - आज होली की शुभ कामनाएं - सपर...गूढ़ प्रश्नों से दूर - आज होली की शुभ कामनाएं - सपरिवार - सादर - मनीषजोशिमhttp://www.blogger.com/profile/08624620626295874696noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-5004531893346374759.post-5119796102905803272008-03-20T10:00:00.000-07:002008-03-20T10:00:00.000-07:00चन्दू भाई आपने टोका तो मैंने अपने उस शब्द का फिसलन...चन्दू भाई आपने टोका तो मैंने अपने उस शब्द का फिसलना देखा ! फिलहाल उसे हटा दिया ब्लाग से! दुबारा रिव्यू करूंगा ! आपकी किताब इतनी रात गए मेरे पास है और खुशी है कि मेरे पास है। बिल्कुल चेतन के शोकनाच की तरह ! मेरा सलाम !शिरीष कुमार मौर्यhttp://www.blogger.com/profile/05256525732884716039noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-5004531893346374759.post-59938538970983035632008-03-20T08:39:00.000-07:002008-03-20T08:39:00.000-07:00"जब मैं मुख्यधारा से अलग मत को संदेह की दृष्टि से ..."जब मैं मुख्यधारा से अलग मत को संदेह की दृष्टि से देखने की प्रवृत्ति को आचार-व्यवहार के बजाय दर्शन से जुड़ा सवाल कहता हूं तो इससे मेरी मुराद यह है कि कम्युनिस्ट विचारधारा में जाने-अनजाने 'व्यक्तिवाद' को कम्युनिस्ट संगठन और आंदोलन विरोधी किसी खलनायक का सा दर्जा हासिल हो गया है, जबकि कला, साहित्य, विज्ञान या सोच-समझ के किसी भी सीमावर्ती दायरे में कोई बुनियादी काम एक स्तर के व्यक्तिवाद के बगैर संभव ही नहीं है।"<BR/><BR/>बहुत अच्छी तरह से एक बडे सवाल को आपने बडी समझदारी से उठाया है. इस तरह की खामखां की बहुत ज़रूरत है. एक बडा जनवादी तबका, भी प्रतिबद्ध विचारधारा से इसीलिये अलग रहता है. <BR/><BR/>और प्रतिबद्ध् जन बहुतायत मे इस प्रिष्ठ्भूमी से आते है कि उनकी "प्रोफेसनल ट्रेनिग" नही होती. पूंजीवादी व्यवस्था मे घिसकर भी दुनिया की जो समझ बनती है, उससे उनकी वाक़िफियत नही होती. खास्तौर पर नये प्रतिबद्ध मौलवी, दो चार किताबे और लगातार एक घेरे की बहसो मे उलझे रहने के कारण, वो हाथी की सुन्ड को पूरा हाथी समझ लेते है, और सज़दे मे दुहरे हुये जाते है.swapandarshihttp://www.blogger.com/profile/15273098014066821195noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-5004531893346374759.post-50489226657450403932008-03-20T07:54:00.000-07:002008-03-20T07:54:00.000-07:00गहरा और संतुलित विश्लेषण। वैसे, तीसमार खां लोग ही ...गहरा और संतुलित विश्लेषण। वैसे, तीसमार खां लोग ही ज्यादा उछलते-कूदते हैं। बाकी लोग तो सोच और कर्म में ठंडा-ठंडा, कूल-कूल चल रहे हैं। कहीं से कोई उनके बारे में जोर से बोल देता है, तो ज़रूर चिहुंक जाते हैं। वरना, आत्मनिर्भर किसान अर्थव्यवस्था से जुड़ी सोच की मस्ती गजब की है।<BR/>होली है। होली मुबारक...अनिल रघुराजhttp://www.blogger.com/profile/07237219200717715047noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-5004531893346374759.post-62065170622353286472008-03-20T06:20:00.000-07:002008-03-20T06:20:00.000-07:00श्रीमान खांमखां के इस हस्तक्षेप की बहुत दिनों से प...श्रीमान खांमखां के इस हस्तक्षेप की बहुत दिनों से प्रतीक्षा थी . आभार !Priyankarhttp://www.blogger.com/profile/13984252244243621337noreply@blogger.com